अगर आपको बिहार चुनाव को महसूस करना है तो आप पटना को छोङकर किसी गाँव में चल जायें।आपको कोई भी योगेंद्र यादव से कम नहीं लगेगा,हर कोई अपनी पार्टी को अपने अनुसार जीता रहा है।
पर एक बात और है कि-बिहार की राजनीति और भाषा में ननद-भौजाई और साली-बहनोई का रिश्ता होता है,तो ध्यान दीजिए की आप किसी
की गाली को गाली न हीं समझें तो बेहतर।
नीतीश कुमरवा ठीक नहीं किया बिहार की जनता के साथ,जिसको जंगलराज बोलता था,अपने भी वही जंगल में घूस गया।जनमत के साथ अन्याय किया है नीतीशवा।क्या पता इसको क्या हो गया भाजपा से?एक नंबर का अहंकारी आदमी है।
मोदी जी से क्या पता इसको क्या नफरत है?नीतीशवा मरते दम तक मोदी जी में मिल पायेगा क्या?एकदम गद्दार है नीतीशवा।
एक बात ये है कि-इसको क्या पता भूमिहार से क्या बैर है,हमलोग हीं इसको बनायें और हमसे हीं
होशियारी करता है।एक बात आपलोग सून लीजिए हमलोग को कोई गरज नहीं है की उसके पास जायें,उसको तो आज नहीं तो कल गरज पङेगा हीं।
समझ लीजिए कि-अगर लालू फिर से आ गया तो
हमलोगों से क्या-क्या करेगा।पूरा माहौल 20 साल पहले वाला हो जाएगा,आप फिर से अपने दलान पर ऐसे नहीं बैठ पायेंगे।
सरकारी नौकरी में पूरा अहिराँव मजा देगा,हर थाना-ब्लाँक में यादव अफसर को भर देगा।
एक बात और कि-इस बार नीतीशवा अगर आ गया तो भूमि सुधार कानून पक्का लायेगा हीं।
और हाँ जो निजी नौकरी है उसमें भी यादव लोग
को धर के भर देगा।
ये महोदय थे भाजपा के टिटिहर नेता।
कुछ देर बाद दलान पर हीं एक कम्युनिस्ट नेता आते हैं।
उनको देखते हीं लोग कहते हैं कि-देख! कुतवा चंदा के लिए आ रहा है।कम्युनिस्ट पार्टी आज भी काडरों के चंदे से हीं चलता है।आते हीं उन्होंने ज्ञान पेलना शुरू कर दिया।आपलोग भाजपा के फेरे में काहे हैं?ये पूँजिवादी लोगों की पार्टी है,ये आम जनता,गरीब,किसान,मजदूर का कभी भला नहीं कर सकती है।भाजपाअंबानी,अदानी के हाथों बिक ग ई है।भाजपा के रहते सांप्रदायिक सौहार्द कभी नहीं पनप सकता।इसको नागपुर से संचालित किया जाता है।दोगला होता है भाजपा वाला सब,आपलोग के लिए राम मंदिर बनवा दिया न,वैसे हीं आप सब का 5 साल में विकास कर देगा मोदिया।
जाते-जाते भूमिहार छाप काँमरेड कुछ अच्छी बातें भी कह ग ए-अगर हम किसी के हाथों बिकेंगे तो,कभी न कभी हर मोर्चे पर हम हारेंगे।अगर सरकार आगे कभी भी भूमि अध्यादेश लाती है तो हम आपलोगों के लिए मरनों को तैयार रहेंगे-आगे कहते ग ए-:पुर्जा-पुर्जा कट मरै पर कबहुँ न छोङै खेत।खैर,एक बात है गाँव के काँमरेडो को आज भी कोई नहीं खरीद सकता है।
राजद के उम्मीदवार हमारे गाँव नहीं आते हैं।
राजद ने पालीगंज से इस बार पूर्व केन्द्रिय क्रिषि मंत्री राम लखन यादव के पोते को मैदान में उतारा है।भाजपा से कट्टर भूमिहार की छवि रखने वाले रामजन्म शर्मा को फिर 1985 के बाद मौका दिया है।अमित साह अपनी रैली में बोल रहे थे-देखिए तो कितना अच्छा नाम है,रामजन्म,ये आपके पास रामलल्ला का आशीर्वाद लेकर आये हैं।
ये बातें थीं अलग-अलग दल के नेताओं कि।
जैसा की भूमिहारों को लालू के जंगल राज का डर पहले से किस तरह दिखाया जा रहा है।लोगों को विकास के नाम पर किस हद तक बर्गलाया जा रहा है।लालू का जंगलराज कि छवि गढने में सवर्णों,खासकर भूमिहारों कि अव्वल भूमिका रही है।पर सच्चाई यह है कि लालू के जंगल राज का फायदा सबसे अधिक सवर्णों को हीं हुआ।आप चारा घोटाला को हीं ले लीजिए,अधिकांश अभियुक्त सवर्ण हीं थे।
आज भूमिहार जाति के लोग विकास के नाम पर हीं सिर्फ वोट देते हैं,मोदी ब्रांड वाला विकास।भूमिहार लोग हीं 2004 के लोकसभा चुनाव में आरा लोकसभा क्षेत्र से रणवीर सेना के प्रमुख बर्मेश्वर मुखिया को भी विकास के नाम पर हीं वोट दिये थे।
क्या विकास और जाति एक दूसरे के पर्याय हैं।
भाजपा हीं बस विकास करेगी और उसमें भी अपनी जाति वाला हो तो सोने पर सुहागा।
इन लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार ने जो भी किया वह भाजपा के चलते हीं संभव हो सका है।
आप अगर इनसे अधिक सवाल करेंगे तो हो सकता है कि ये आपको काट भी खायेंगे।
बस देखते रहिए,तमाशा देखते रहिए,लोकतंत्र के महापर्व में होने वाले तमाशे को देखते रहिए।हो सके तो एक कोने में खङे होकर देखिए,और अच्छा दिखेगा।
एक पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारा भी दिया है-हारेंगे तो हुरेंगे,जितेंगे तो पेलेंगे।ये नारा देने वाले लोग केसरिया और राष्ट्रवाद का गुण गाते हैं।