Saturday, 15 August 2015

राखी और दिदी।

माँ तो बस एक हीं होती है,पर मेरी एक और माँ है। बिल्कुल माँ कि तरह हीं प्यार करती हैं,माँ से अधिक ख्याल रखती हैं।मेरा बचपन उनके साथ हीं कटा
मैं अपनी दिदी कि बात कर रहा हूँ।कुछ दिन पहले उनका फोन आया था, पूछ रहीं थी कि रायपुर राखि भेज देते हैं।मैं कुछ भी बोलने की दशा में नहीं था।शायद वो मेरी चुप्पी को परख लीं।
दिदी के बिना यह मेरी दुसरी राखी होगी।शायद आनेवाले समय में यह अंतराल और बढेगा हीं
राखि के कारन हीं पहलेसकि क ईं बातें मन में कौंधने लगीं है।आप कितनी तैयारियाँ करतीं थीं राखि को लेकर।दिल में जो बातें कहीं खो सी ग ईं थीं आज फिर से याद आ रहीं हैं।
ये भाई-बहन का प्रेम हीं तो है जिसके कारन ईतनी दुर बैठा आपको याद कर रहा हूँ।
आप मुझसे ११ साल बङी होने के बाद भी जो लङाईयाँ करती थीं आज मन को एकाएक खुशी दे रहीं हैं।हमलोगों कि लङाईयाँ रिश्तेदारों के यहाँ भी मशहूर हैं।
आपको याद होगा कि कैसे पापा भी हमारे बिच में  होने वाली लङाईयों से अजीज आ जाते थे।आपके कारन हीं पापा मुझे क ई बार अपना बङा वाला ऊपहार दे देते थे।
सबसे अधिक परेशान तो माँ होती थीं।हमें एक-दुसरे से न बोलने का सौगंध तक दे देती थीं।
उसके बाद जब आप रोती थीं तो मुझे बङा आनंद मिलता था।भ ईया हमारी बातों को कैसे चुपचाप देखता था।
आपको याद करके पटना वाला डेरा याद आ गया।कैसे बिजली चले जाने पर आप रात भर जगकर पंखा झालती थीं।आपको जो कुछ भी मिलता था उसमें एक हिस्सा मेरा भी होता था और आप कहती थीं-बाबु के लिए रख दे रहें हैं,आएगा तो खा लेगा।
मेरा बचपन तो आपके साथ हीं बीता।माँ तो कभी-कभी हीं पटना आती थीं।
आपने माँ के दुर होने का एहसास कभी नहीं होने दिया।
लोग कहते भी थे-कितना प्रेम से तिनों भाई बहन रहते हैं।
घर में लोग मुझे मयफट समझते हैं।
पर आपकी बिदाई के दिन सबसे अधिक मैं हीं रोया था,ईतना अधिक कि आप चुप होकर मुझे चुप कराने लग ग ईं थीं।
आपके बिदाई के कुछ दिनों बाद तक ऐसा लगता था कि किसी ने हमसे मेरे सबसे अनमोल चिज को छीन लिया।
आज भी पटना या आरा जाता हूँ तो माँ के बाद सबसे पहले आपको हीं देखने जाना चाहता हूँ।
अब तो छुटकी भी मिलने का बहाना हो ग ई है।
आपने मुझे जितना प्यार दिया है ऊतना शायद हीं मैं आपको दे सकूँ पर कोशीश जरूर करूँगा।
हमारे बीच में राखी का प्यार ईसी तरह बना रहे।

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