अक्सर हाई स्कूल लेवल तक लोग अपने पैरेन्टस से पढने लिखने के लिए हीं डाँट फटकार खाते हैं।
पर पढाई लिखाई वाले मामले में मैं स्वयं जागरूक रहा हूँ।
दसवीं में फ्रैक टिकल में साईंस की परीक्षा थी,पर मैंने अपनी काँपी हीं पूरी नहीं की और उस अधूरी काँ पी को हीं जमा कर दीया।
और मेरी प्रैकटीकल जो लेने वाले थे,वो हमारे स्कूल के सबसे अच्छे और मेरे आदर्नीय बायोलाँजी के चौधरी सर।
मेरा कलेजा मूँ ह में था।
सर ने तो कङी फटकार लगाई हीं और मामले को सीधे पापा तक रसीद कर दीया जो की उसी स्कूल में शिक्षक हैं।
मैं स्कूल से घर पहले आ गया था और मन हीं मन अनेक दुआएँ माँग रहा था जो कि उस व क्त स्वभाविक था।
पापा भी आ गये।
दरवाजा खोलते हीं वो मेरे ऊपर तूफान की तरह बरस पङे।
नालायक और ना जाने क् या क्या कहे।
पर उस घटना ने मूझे निखारने का काम किया।
आप दोनों का शुक्रीया।
खैर मैंने कभी भी पापा के होने का फायदा लेने की कोशिश नहीं कि,फायदा तो दूर की बात है ऐसे खयाल तक नहीं आये कभी भी मन में।
यहाँ तक की बारहवीं में जहाँ मेरा सेन्टर था वहाँ जाने से पापा को मना कर दिया था।
हमेशा एक साधारण छात्र की तरह रहकर पढाई की बिल्कुल सबसे अनजान बनकर।
Sunday, 19 April 2015
जब पापा ने आखिरी बार डाँटा था।
Saturday, 18 April 2015
जे ठ
तपता तो जेठ का महीना है।
का पंखा का कुलर सब उसके आ गे नत्मस्तक हो जाते हैँ।
जेठ के रौब के आगे ए.सी भी फेल है।
जेठ की दोपहरी मे दही,भात और आम खाकर जो नशीली निंद आती है उसकी कोई तुलना नहीं है।
गांव जेवार में जेठ एकदम अलग किस्म का होता है।
कोई सार्व जनिक दालान में गांव भर के लोगों का मजौ डा।
ईत ने में फला ने भ ईया आके बोले की चल तनी ताश हो जाए।
जादे हुआ त बाबा बोले की जा हो तनी बेल के खूब मीठा शरबत ले आव।
बेल के शरबत पीके सबके मीजा ज टंच।
गर्मी की छुट्टियों में पहले गांव जाता था।
ईध र क ई सालों से नहीं गया।
अब कालेज में आ गया,फीर भी यादें दील में बसी हैं और रहेंगी भी।
हे जेठ तुमको मेरा सलाम।
Saturday, 4 April 2015
Kya khabar hai
Kya khabar hai,paper kaisa aaya tha?
Badhiyaa gaya naa.
Haan badhiyaa gaya,lekin physics thora tough tha,itne me bagal wala bolta hai ki Maths bhi tough tha.
Arre bhai tough rahegaa nahin,engineering kaa exam hai,aise hee engineer ban jaaoge,bagal me se ek uncle bolte hain.
Ohh,do aata hua question galat kar diye,isse rank par bahut pharak par jaaega ki.
Itne me ghar pahuchate hain,sablog haal-chaal lete hain.
Abb answer milaane kaa tension.
Raat ko neend nahin aai.
Abb result kaa intezaar.
Badhiyaa rank aa paaegaa ki nahin.
Arre bhai apne aap ko inn 3hours se kyun judge karte ho,ye 3hour tumhaari zindagi nahin hai,zindagi bahut hai,exams ke bahut aage bhi zindagi hai.
Tension kaahe lete ho.
Tension free raho naa.
Abb khoob aaram se so jaao naa.
Thori kahaniyaan padh lo.
Thori music sun lo naa.
Apne doston se thori baat karlo naa.
Apne maa-papa ke kareeb jaao naa.
Bhai bahut accha lagega,thori apni dil ki bhi sun lo naa.