कल से बिहार बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षा शुरू होने वाली.है।खैर,मैं स्वयं दसवीं बिहार बोर्ड से नही दिया हूँ,पर बिहार बोर्ड को बहुत करीब से महसूस किया हूँ।
कल लोग नही बोलेंगे कुछ,कल हमेशा चुप रहने वाली तमाम सड़कें और गाँव की पगडंडियाँ गवाही देंगी की आज से बिहार बोर्ड के दसवीं की परीक्षा का आगाज हो गया है।
बता दूँ की यह सिर्फ परीक्षा मात्र नही होती है,यह एक पर्व सरीखा होता है,आज तक जो लड़कियाँ घर से नही निकली होंगी,जिनका जीवन अपने गाँव के चौहद्दी तक सिमित रहा होगा,वो कल सुबह होते ही तमाम आशंकाओं और बाधाओं को तोड़ते हुए कोई अनजान से कस्बे और शहर का रूख करेंगी।
बिहार बोर्ड के बारे मे बहुत सारी बतकही है,बिहार बोर्ड परीक्षा को तो क ई भद्रजन बस चोरी और छिनत ई से ही समझने की कोशीश कर लेते हैं।बिहार बोर्ड को चोरी का अड्डा कहकर फैंतेसाईज भी कर लेते होंगे कुछ महाराज टाईप के लोग।
खैर,ये बात भी है की बिहार बोर्ड में बहुत जगह चोरी-छिनत ई होता है।आप ड्यूटी पर तैनात सिपाही जी को खैनी-पान भर पैसा दे दिजिए और वो आपके वार्ड के पास तमाम पोथी-पूर्जा रसीद कर देंगे।मास्टर साहेब लोग भी बहुत सेटिंग करते हैं,हर तरह से।बिहार बोर्ड परीक्षा की क ई कहानियाँ आज किंवदंति बन ग ई हैं।पुराने टाईम मे लोग अपने लंगोट तक में पूर्जा खोंस के ले जाते थे,फिर एटम बम का जमाना आया।एटम बम को बेंच के भितरी स्पेस में सेट कर दीजिए और फिर उसमें पूर्जा रखकर चेंप दीजिए।
ये सब जुगाड़ साधारण लोग से लेकर नेता मंत्री के वार्ड के लिए भी होता है।
और दिगर बात ये है की जहाँ प्रशासन ने लगाम दबाया की छात्र के साथ आये उनके परिजन लोग क्रांतिकारी हो गये,भ ईया जे.एन.यू वाले लोग भी ऐसी क्रांति कहाँ करते होंगे।
कड़ाई जहाँ हुआ की एक कैंडिडेट के साथ जो तीन लोग अतिरिक्त आते हैं,वो कटने-मरने के लिए भी तैयार।यै लै जिंदाबाद-मुर्दाबाद का नारा चालू।इसलिए प्रशासन भी बहुत कम बार ही ऐसी करने का ज़हमत उठाता है,खासकर दूर-दराज के क्षेत्रों में तो एकदम नही।
ये पहला पक्ष है,दूसरा पक्ष मज़ेदार कम पर सुंदर अधिक है।बिहार बोर्ड का परीक्षा अपने भीतर संघर्ष की क ई कहानियों को बयां करता है।क ई नगीने निकलते हैं बिहार बोर्ड से,जिनकी अनूठी कहानियाँ होती है सफलता की।
एक बार मैंने पढ़ा था कही की कैसे एक लड़का गाँव की पगडंडी पर चलती भैंसों के पीठ पर बैठकर तैयारी करता था,क्योंकि गरीबी होने के चलते परिवार वाले नही चाहते थे की उनका नन्हका आगे पढ़,पर किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था।आज वह लड़का आ.आई.टी,बनारस में पढ़ रहा है।बिहार बोर्ड के चलते ही क ई अनजान जगह हमेशा के लिए लोगों के मानस पटल पर आ जाता है।
इसलिए कोई भी बिहार बोर्ड की परीक्षा को चिट्ठा और फर्रा नाम की सज्ञाओं से ही मत फैंतेसाईज करो।
Thursday, 10 March 2016
बिहार बोर्ड की परीक्षा को तुम फैंतेसी का नाम मत दो।
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