आप नास्तिक हैं क्या? कुछ दिनों से कुछ ऐसे ही सवालो से गुजरना पड़ रहा है।जबतक आप बहुमत मे होते हैं,तो आपसे कोई भी सवाल नही करता,आप सभी की नजरों मे सही होते हैं।पर आपने जैसे ही कोई अपना वैकल्पिक
रास्ता अख्तियार कर लिया,आप पर तोप से प्रहार किया जायेगा,ऐसे प्रश्न पूछे जायेंगे जिनका औचित्य ही नही है,जिसका उत्तर पूछने वाले के पास भी नही है।
धर्म एक ऐसा चीज़ है जिसपर चर्चा करने वाला व्यक्ति चाहता है की सभी लोग उसके कहे अनुसार बात करे,कोई भी किसी तरह का सवाल न खड़ा करे।अगर आप सवाल करते हैं तो आप पर ही तंज़ किये जायेंगे,आप के तर्कों को काटने के लिए तमाम तरह के कुतर्कों को जन्म दिया जायेगा।
मैं किसी भी धर्म को इसलिए भी नही मानता क्योंकि धर्म हमे अपनी तरह से सोचने नही देता,तमाम जगहो पर अवरोधक तत्व का काम करता है।
धर्म को एक हथकंडे के रूप मे जिस तरह से इस्तेमाल किया जाता रहा है,वह चीज मुझे व्यथित करता था।
धर्म मे एक भगवान होता है,जिसे सर्वोपरि मान लिया जाता है,उसके अत्याचारो का भी महिमामंडन किया जाता है,उसके द्वारा दिये गये तमाम दुख और दर्द को भाग्य जैसा मानवनिर्मित शब्दो से जोड़कर उसे क्षमा कर दिया जाता है।
मै अपने आप से रोज सवाल करना चाहता हूँ,हर तरह के सवाल करना चाहता हूँ,जो की शायद ही कोई धर्म करने को ईजाज़त दे।मै हर चीज से सवाल करना चाहता हूँ,जानना चाहता हूँ,सीखना चाहता हूँ।
भगवान को लोग अजर,अमर,सर्वव्यापक,सर्वशक्तिमान मानते है,अगर कोई इतना कुछ है तो उसे किसी चीज़ से नही डरना चाहिए,हर तरह के सवालो से गुज़रना चाहिए,जबाव भी देना चाहिए।
पर,सवाल करने से भगवान को ठेस पहुँचता है,वे आहत होते हैं,इतने गुण होने के बाद भी आखिर कोई नियमो का दास कैसे हो सकता है?अगर वो दास है तो मै उसे नही मानता।
किसी को अगर आप भगवान मे विश्वास दिलाकर उसका सबकुछ लूट भी लेते हो तो,आप पर कोई सवाल नही कर सकता,यही भगवान है।पर मै सवाल करना चाहता हूँ।
रोम जल रहा था और निरो अपना मनोरंजन कर रहा था,जश्न मना रहा था,भगवान भी तो लोगो को मारता है,शायद निरो से भी निर्मम तरीके से,भगवान भी तो मनोरंजन करता मौतों को देखकर।इसलिए मै भगवान के अस्तित्व को व्यक्तिगत रूप से खारिज करता हूँ।
तमाम लोगो पर जो अत्याचार किया जाता है,उसमे भी भगवान का ही नाम होता है,चाहे वह अत्याचार ब्रहमणों और मठाधिसों द्वारा दलितो पर किया जाये या सामंतो द्वारा गरिबो का शोषण किया जाये।
रास्ता अख्तियार कर लिया,आप पर तोप से प्रहार किया जायेगा,ऐसे प्रश्न पूछे जायेंगे जिनका औचित्य ही नही है,जिसका उत्तर पूछने वाले के पास भी नही है।
शायद ही मैने कभी किसी को किसी से पूछते हुए देखा हो-कि क्या आप ना
आस्तिक है क्यो नही है पर नास्तिकता पर सवाल उठायेंगे बिना कोई तर्क के।
मैं किसी भी धर्म को इसलिए भी नही मानता क्योंकि धर्म हमे अपनी तरह से सोचने नही देता,तमाम जगहो पर अवरोधक तत्व का काम करता है।
धर्म को एक हथकंडे के रूप मे जिस तरह से इस्तेमाल किया जाता रहा है,वह चीज मुझे व्यथित करता था।
धर्म मे एक भगवान होता है,जिसे सर्वोपरि मान लिया जाता है,उसके अत्याचारो का भी महिमामंडन किया जाता है,उसके द्वारा दिये गये तमाम दुख और दर्द को भाग्य जैसा मानवनिर्मित शब्दो से जोड़कर उसे क्षमा कर दिया जाता है।
मै अपने आप से रोज सवाल करना चाहता हूँ,हर तरह के सवाल करना चाहता हूँ,जो की शायद ही कोई धर्म करने को ईजाज़त दे।मै हर चीज से सवाल करना चाहता हूँ,जानना चाहता हूँ,सीखना चाहता हूँ।
भगवान को लोग अजर,अमर,सर्वव्यापक,सर्वशक्तिमान मानते है,अगर कोई इतना कुछ है तो उसे किसी चीज़ से नही डरना चाहिए,हर तरह के सवालो से गुज़रना चाहिए,जबाव भी देना चाहिए।
पर,सवाल करने से भगवान को ठेस पहुँचता है,वे आहत होते हैं,इतने गुण होने के बाद भी आखिर कोई नियमो का दास कैसे हो सकता है?अगर वो दास है तो मै उसे नही मानता।
किसी को अगर आप भगवान मे विश्वास दिलाकर उसका सबकुछ लूट भी लेते हो तो,आप पर कोई सवाल नही कर सकता,यही भगवान है।पर मै सवाल करना चाहता हूँ।
रोम जल रहा था और निरो अपना मनोरंजन कर रहा था,जश्न मना रहा था,भगवान भी तो लोगो को मारता है,शायद निरो से भी निर्मम तरीके से,भगवान भी तो मनोरंजन करता मौतों को देखकर।इसलिए मै भगवान के अस्तित्व को व्यक्तिगत रूप से खारिज करता हूँ।
तमाम लोगो पर जो अत्याचार किया जाता है,उसमे भी भगवान का ही नाम होता है,चाहे वह अत्याचार ब्रहमणों और मठाधिसों द्वारा दलितो पर किया जाये या सामंतो द्वारा गरिबो का शोषण किया जाये।
No comments:
Post a Comment