दो लोग थे।
एक लङका था और एक लङकी।
दोनों एक-दूसरे को लंबे अरसे से जानते थे।
शायद दोनों रोज हीं मिलते थे।
दोनों साथ में पिक्चर भी देखने जाते थे।
हर बात पर एक-दूसरे कि सलाह लेते।
दोस्ति ईतनी हर एक के बात पर एक को दम निकलता।
आधी रात को भी एक-दूसरे के लिए हाजीर।
दोनों लंबी लंबी यात्रायें करते।
दोनों छुट्टियों में घर भी एक साथ हीं जाते।
दोनों के आँखों में कुछ सपने थे।
लङका दुनिया बदलना चाहता था,लङकी के भी कुछे अनकहे सपने थे।
ईतनी करिबी होने के बाद भी लङके ने कभी उसे प्रपोज नहीं किया,कभी आई लव यू नहीं बोला।
लङकी ने भी कुछ ऐसा बोला।
एक दिन आधी रात को लङका अपना बैग पैक कर रहा था।
लङकी पूछती है-तू कहाँ जा रहा है।
लङका बोलता है-ऐसी जगह जहाँ से फिर कभी ना लौटना है।
लङकी बोलती है-तो मैं भी तेरे साथ चलुँगी।
फिर क्या।
दोनों चल देते हैं कभी न खत्म होने वाले सफर के लिए।
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