मानीय नेतागण और हमारे देश के राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता और क्रांतिकारी विचारधारा के ठेकेदार,आपलोगों की नैतिकपतनशीलता की पराकाष्ठा और संवेदनहीनता कि इंतिहा हमसब बहुत बार देख चुके हैं.
हमलोग अपने प्रजातंत्र का चौंथा स्तंभ माननीय मीडिया कि चुप्पी को भी अच्छी तरह समझते हैं,उनका तो टी.आर.पी हीं धंधा हो गया है,उन्हें खबर से तो मतलब हैं ही नहीं कुछ अपवादों को छोड़कर,कुछ बेहतरीन लोग भी हैं मीडिया में.
एन.आई. टी श्रीनगर का मुद्दा किसी के साँचे में फिट नहीं बैठ रहा है,वैसे भी लुटियन दिल्ली के बाहर का बहुत कम मुद्दा हीं इनके साँचे में फिट बैठता है.
राष्ट्रवाद के ठेकेदार एक पार्टी विशेष के कई लोग एक-दो दिन पहले हीं मोहतरमा महबूबा मुफ्ति के सपथ ग्रहन समारोह में गये होगे,उन्हें श्रीनगर एन.आई.टी जाना.चाहिए था,बस खानापूर्ति करने जितेन्द्र सिंह कल गये थे.
एक बात और है जैसा की मैं बहुत जगह देख रहा हूँ,सोशल मीडिया पर खासकर,तिरंगा झंडा ही बस देशभक्ति का प्रमाण नही है और राष्ट्रवाद का भी नहीं.इस पर विस्तार से कभी बाद में.
पर छात्रों पर जिस तरह के बरबरता की खबरें आ रही है,वह बहुत हीं अफसोसजनक और निंदनीय है.
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